धान आधारित फसल प्रणाली पर द्वि-फसल क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम
छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा राज्य में एक फसली कृषि भूमि को द्वि-फसली क्षेत्र में परिवर्तित करने तथा धान आधारित फसल चक्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “धान आधारित फसल प्रणाली पर खरीफ बोनी का समूह प्रदर्शन (वर्षा आधारित/असिंचित क्षेत्र हेतु)” कार्यक्रम लागू किया गया।
योजना की पृष्ठभूमि
राज्य के अधिकांश कृषि क्षेत्र में एक ही फसल ली जाती है। इस स्थिति में उत्पादन वृद्धि तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान के बाद रबी फसल लेने को प्रोत्साहित करना आवश्यक माना गया। इसी उद्देश्य से यह द्वि-फसल क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्देश्य
- कृषकों को दो फसली खेती के लिए प्रोत्साहित करना।
- रबी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना।
- वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना।
कार्य क्षेत्र
- योजना राज्य के सभी जिलों में लागू होगी।
कार्यक्रम की रूपरेखा
1. प्रदर्शन क्षेत्र का आकार
- प्रत्येक प्रदर्शन न्यूनतम 4 हेक्टेयर के क्लस्टर में आयोजित किया जाएगा।
2. हितग्राही पात्रता
- एक कृषक को न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर एवं अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक सहायता की पात्रता होगी।
3. अन्य प्रावधान
- लघु एवं सीमांत कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- क्लस्टर का चयन पंचायत स्तरीय सहयोग से किया जाएगा।
- लाभार्थी कृषकों की सूची पंचायत में अनुमोदन उपरांत सार्वजनिक की जाएगी।
प्रति हेक्टेयर सहायता
योजना अंतर्गत चयनित फसलों पर कृषकों को आदान सहायता प्रदान की जाएगी। (दस्तावेज के पृष्ठ 2 में दी गई सारणी के अनुसार) प्रति हेक्टेयर अनुमानित सहायता निम्नानुसार है:
- बीज
- उर्वरक
- सूक्ष्म पोषक तत्व
- कीटनाशक
- अन्य कृषि आदान
(कुल सहायता राशि लगभग ₹3000 से ₹6000 प्रति हेक्टेयर के बीच निर्धारित है, फसल के अनुसार)
क्रियान्वयन प्रक्रिया
- पात्र कृषकों का चयन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा।
- चयनित कृषकों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
- प्रदर्शन क्षेत्र का भौतिक सत्यापन संबंधित कृषि अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
वित्तीय प्रावधान
योजना के लिए विभिन्न मदों के अंतर्गत वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें शामिल हैं:
- कृषि कार्य
- अनुसूचित जनजाति उपयोजना
- अनुसूचित जाति उपयोजना
- आर्थिक सहायता (प्रत्यक्ष सहायता)
वित्तीय वर्ष 2014–15 के लिए यह कार्यक्रम लागू किया गया है।
पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण
योजना का संचालन एवं निगरानी कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा की जाएगी। जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर कृषि अधिकारी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी होंगे।
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