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ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन योजना

राज्य में लगभग 37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। इनमें से लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान लिया जाता है। ग्रीष्मकालीन धान उत्पादन में अधिक जल उपयोग, भू-जल दोहन तथा सीमित लाभप्रदता जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल लेने हेतु प्रोत्साहन योजना लागू की गई है।

योजना की आवश्यकता

दस्तावेज़ (पृष्ठ–1) में उल्लिखित प्रमुख कारण निम्न हैं:

  1. ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का लेने से कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे भू-जल स्तर संरक्षण संभव है।
  2. दलहन फसलें भूमि में नत्रजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं।
  3. तिलहन एवं मक्का अपेक्षाकृत कम लागत में अधिक लाभ प्रदान करते हैं।
  4. फसल विविधीकरण से जोखिम कम होता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।

योजना का उद्देश्य

  1. ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का के क्षेत्र का विस्तार करना।
  2. रबी/ग्रीष्म फसलों का रकबा बढ़ाना।
  3. दलहन, तिलहन एवं मक्का के उत्पादन में वृद्धि करना।

कार्य क्षेत्र

  • योजना राज्य के समस्त जिलों में लागू होगी।
  • प्राथमिक फसलें: ग्रीष्मकालीन दलहन, तिलहन एवं मक्का।

पात्रता एवं शर्तें (पृष्ठ–2 के अनुसार)

  1. ऐसे कृषक जो ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन या मक्का लेंगे, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  2. जिन क्षेत्रों में परंपरागत रूप से ग्रीष्मकालीन धान लिया जाता रहा है, वही क्षेत्र पात्र होंगे।
  3. कृषक को अपने खेत पर ही फसल लेना अनिवार्य होगा।
  4. प्रथम वर्ष ग्रीष्मकालीन दलहन, तिलहन एवं मक्का लेने वाले कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  5. चयनित क्षेत्र का भौतिक सत्यापन कृषि विभाग द्वारा किया जाएगा।

वित्तीय सहायता (पृष्ठ–2 के अनुसार)

  • प्रति हेक्टेयर ₹2,000 की दर से अधिकतम 2 हेक्टेयर तक सहायता।
  • प्रति कृषक अधिकतम ₹10,000 की सीमा।
  • न्यूनतम पात्रता क्षेत्र 0.4 हेक्टेयर।

सामग्री वितरण व्यवस्था

अनुदान राशि नगद के स्थान पर बीज/उर्वरक आदि आदान सामग्री के रूप में दी जाएगी।
आदान सामग्री का वितरण अधिकृत सहकारी समितियों, राज्य बीज निगम या कृषि विकास निगम के माध्यम से किया जाएगा।
आवश्यकता अनुसार अनुदान सीधे कृषक के खाते में भी दिया जा सकता है।

समय-सीमा (पृष्ठ–2)

  • इच्छुक कृषक 15 मई तक आवेदन करेंगे।
  • कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा आवेदन परीक्षण के उपरांत जिला कार्यालय को अग्रेषित किए जाएंगे।
  • स्वीकृत सूची के आधार पर सामग्री वितरण किया जाएगा।

निगरानी एवं अनुश्रवण (पृष्ठ–3)

  • कृषि विस्तार अधिकारी क्षेत्रीय निरीक्षण करेंगे।
  • उप संचालक कृषि द्वारा समीक्षा की जाएगी।
  • अनियमितता पाए जाने पर राशि वसूली का प्रावधान है।

लक्षित प्रगति (पृष्ठ–3 में सारणी)

योजना अंतर्गत विभिन्न फसलों के लिए लक्षित क्षेत्र विस्तार निर्धारित किया गया है, जिनमें दलहन, तिलहन एवं मक्का शामिल हैं।

वित्तीय प्रावधान (पृष्ठ–4)

योजना के संचालन हेतु विभिन्न बजट मदों से राशि स्वीकृत की गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • कृषि कार्य मद
  • आदिवासी क्षेत्र उपयोजना
  • अनुसूचित जाति उपयोजना
  • आर्थिक सहायता (प्रत्यक्ष सहायता)

योजना वित्त विभाग की स्वीकृति दिनांक 26.04.2013 के आधार पर लागू की गई है।

निष्कर्ष

ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल को प्रोत्साहन देने की यह योजना जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता वृद्धि तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। फसल विविधीकरण के माध्यम से राज्य की कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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