बड़वानी के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं प्लास्टिक लाइनिंग वाले खेत तालाब, दुगनी हो रही आमदनी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 09 अक्टूबर 2026, बड़वानी: बड़वानी के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं प्लास्टिक लाइनिंग वाले खेत तालाब, दुगनी हो रही आमदनी – मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर क्षेत्र में प्लास्टिक पन्नीयुक्त (LDPE Lined ) वाले खेत तालाब किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। वाटरशेड विकास परियोजना 05 के तहत 12 किसानों के खेतों में इन तालाबों का निर्माण किया गया है। इनकी मदद से किसान बारिश के पानी को सुरक्षित रखकर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। साथ ही, तालाबों में मछली पालन भी शुरू किया है, जिससे उन्हें फसल उत्पादन के अलावा अतिरिक्त आमदनी मिलने की उम्मीद है।

पारंपरिक मिट्टी के तालाबों में पानी जमीन के नीचे रिसने के कारण जल्दी सूखने की समस्या आती थी। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY-WS) के अंतर्गत वाटरशेड विकास परियोजना 05 के तहत बनाए गए खेत तालाबों में विशेष प्लास्टिक लाइनिंग की गई है। इससे बारिश के पानी को तालाबों में सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है। इन तालाबों में जमा पानी से किसान खरीफ फसलों को जरूरत के समय सिंचाई दे रहे हैं। इसके अलावा, रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में भी इस पानी का उपयोग किया जा रहा है।

इन खेत तालाबों की खासियत यह है कि किसान इनका उपयोग केवल सिंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि मछली पालन के लिए भी कर रहे हैं। पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों ने तालाबों में मछली के बीज डाले हैं। इससे ये तालाब छोटे मत्स्य पालन केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि फसलों से होने वाली आमदनी के अलावा मछली बेचकर भी अतिरिक्त नकद आय प्राप्त होगी। इस तरह एक ही तालाब का इस्तेमाल सिंचाई और मछली पालन, दोनों के लिए किया जा रहा है।

स्थानीय किसानों के अनुसार, पहले उन्हें खेती के लिए मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर रहना पड़ता था। अब खेत तालाबों में बारिश का पानी जमा होने से जरूरत के समय सिंचाई करने में मदद मिल रही है। इससे सूखे और जल संकट के दौरान फसलों को सुरक्षित रखने में सहूलियत हो रही है।

राजपुर क्षेत्र के 12 किसानों के खेतों में बनाए गए ये तालाब जल संरक्षण और एकीकृत कृषि का उदाहरण बन रहे हैं। किसान फसल उत्पादन के साथ मछली पालन को भी आय के अतिरिक्त साधन के रूप में अपना रहे हैं। वाटरशेड विकास परियोजना के तहत किए गए इस प्रयास से आसपास के गांवों के किसानों को भी जल प्रबंधन और खेती में विविधता अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।

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