Tip Of The Day: सरसों की बुवाई में ये गलती पड़ सकती है भारी, पैदावार बढ़ाने का जानें सही तरीका – एग्रीवेट

Team Agrivate
4 Min Read

एग्रीवेट: सरसों की अच्छी पैदावार के लिए अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक बुवाई करना बेहतर माना जाता है. इस समय तापमान और मौसम फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए अनुकूल रहते हैं. सही समय पर बुवाई करने से पौधों को पर्याप्त समय मिलता है.

सरसों की बुवाई से पहले खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करें, ताकि मिट्टी अच्छी तरह भुरभुरी हो जाए. इसके बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर लें. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और सिंचाई के दौरान पानी एक जगह जमा नहीं होता, जिससे बीजों का जमाव भी बेहतर होता है.

किसान सरसों की बुवाई के लिए हमेशा उन्नत और उपचारित बीजों का चुनाव करें. एक एकड़ खेत में करीब 1.5 से 2 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है. बुवाई से पहले बीज उपचार करने से बीज और शुरुआती पौधों को कई तरह के रोगों से बचाने में मदद मिलती है.

सरसों के पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलना जरूरी है, इसलिए बुवाई के समय दूरी का खास ध्यान रखें. लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 10 सेंटीमीटर रखें. बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं, क्योंकि ज्यादा गहराई में बुवाई करने से बीजों के जमाव में परेशानी आ सकती है.

बुवाई के समय मिट्टी की जरूरत के हिसाब से नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की संतुलित मात्रा देना जरूरी है. खासतौर पर सरसों की फसल में सल्फर का इस्तेमाल दानों में तेल की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है. संतुलित पोषण से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल की बढ़वार भी बेहतर रहती है.

सरसों की खेती में सिर्फ अच्छी किस्म का बीज इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है. सही समय पर बुवाई, खेत की अच्छी तैयारी, उचित बीज दर, सही दूरी और संतुलित खाद का इस्तेमाल भी जरूरी है. इन बातों का ध्यान रखने से फसल की बढ़वार बेहतर हो सकती है.

Share This Article