बुरहानपुर: गौशाला संचालन से आत्मनिर्भर बनी महिला किसान वंदना, 65 गौवंश की देखभाल के साथ खाद बेचकर कमा रहीं अतिरिक्त आय – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 23 सितंबर 2026, बुरहानपुर: बुरहानपुर: गौशाला संचालन से आत्मनिर्भर बनी महिला किसान वंदना, 65 गौवंश की देखभाल के साथ खाद बेचकर कमा रहीं अतिरिक्त आय – मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्राम जैनाबाद की वंदना सूर्यवंशी बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। वर्ष 2018 में साईं आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने छोटे-छोटे कार्यों से अपनी आजीविका शुरू की। समूह के माध्यम से उन्हें गौशाला संचालन का अवसर मिला और वर्ष 2021 से वे गौशाला का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। आज गौशाला उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गई है।

वंदना दीदी बताती हैं कि उनके स्व-सहायता समूह में 11 महिलाएं हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बैंक खाता खुलवाने, ऋण संबंधी कार्य कराने सहित अन्य छोटे-मोटे काम किए। इसी दौरान उन्हें गौशाला संचालन का अवसर मिला।

वंदना दीदी के लिए गौशाला संचालन की शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआती दिनों में चारे की व्यवस्था करने में परेशानी होती थी। गौशाला में काम करने के लिए श्रमिक नहीं मिलते थे और गौशाला के प्रबंधन का अनुभव भी नहीं था। गौवंश को पानी पिलाने की पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। कई आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए उन्हें शुरुआत में अपने पास से राशि खर्च करनी पड़ती थी। इन सभी कठिनाइयों के बावजूद वंदना दीदी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने धीरे-धीरे गौशाला के प्रबंधन को समझा और व्यवस्थाओं को बेहतर करते हुए संचालन को व्यवस्थित किया।

वर्तमान में वंदना दीदी की गौशाला में करीब 65 गौवंश हैं, जिनमें 22 गाय और 5 बछड़े सहित अन्य गौवंश शामिल हैं। गौशाला की साफ-सफाई प्रतिदिन सुबह कर्मचारियों द्वारा की जाती है। गौवंश की देखभाल के साथ-साथ यहां गोबर का उपयोग खाद बनाने में किया जाता है। तैयार खाद किसानों को बेचकर वंदना को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि गौशाला संचालन के लिए शासन की ओर से उन्हें 40 रुपए प्रति पशु के मान से सहयोग प्राप्त होता है। वहीं, गौशाला के माध्यम से वे 2 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं, जिन्हें 7-7 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं।

गौशाला संचालन से वंदना दीदी की आय में बढ़ोतरी हुई है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा वे स्कूल में भोजन बनाने का कार्य भी करती हैं। उन्हें अपने काम में संतुष्टि मिलती है और वे आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। वंदना सूर्यवंशी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा सकते हैं।

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