एग्रीवेट: नेस्ले इंडिया के शिशु आहार उत्पाद नैन एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नियमों के कथित उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है. नियामक ने तीन अलग-अलग निर्णयन (Adjudication) मामले दर्ज किए हैं. FSSAI ने कुछ उत्पादों के लेबल पर किए गए दावों को भ्रामक बताया है, जबकि एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक से कम मिलने की बात कही है. दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया ने आरोपों को खारिज करते हुए अपने उत्पादों और लेबल पर किए गए दावों को वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित बताया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नेस्ले के शिशु पोषण उत्पादों और उनके प्रचार की जांच की. इसमें नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला को लेकर आपत्तियां सामने आईं. नियामक ने नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के लेबल पर ‘5HMO’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों को भ्रामक माना. वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 के लेबल पर व्हे प्रोटीन को आसानी से पचने वाला बताए जाने के दावे पर भी सवाल उठाया गया.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान फॉलो-अप फॉर्मूला के एक नमूने में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई. संदर्भ प्रयोगशाला में दोबारा जांच के बाद भी नमूना 2020 में तय किए गए बायोटिन मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया. FSSAI के मुताबिक यह मामला शिशु पोषण से जुड़े उत्पादों में निर्धारित पोषण मानकों के पालन से जुड़ा है.
FSSAI की कार्रवाई के बाद नेस्ले इंडिया ने कहा कि नैन एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो सहित संबंधित उत्पादों और उनके पैकेजिंग लेबल को FSSAI की विशेषज्ञ समिति से पहले मंजूरी मिली थी. कंपनी ने नियामक को अपना विस्तृत जवाब भी सौंपा है. नेस्ले के मुताबिक पैकेजिंग पर किए गए दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित और सत्य हैं तथा कंपनी सभी लागू कानूनों, गुणवत्ता मानकों और पैकेजिंग नियमों का पालन करती है.
कार्रवाई की खबर के बाद शुक्रवार को BSE पर नेस्ले इंडिया के शेयर में इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 2.8 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले 2015 में भी FSSAI और नेस्ले के बीच मैगी को लेकर बड़ा विवाद हुआ था. उस समय सीसे की मात्रा और MSG संबंधी चिंताओं के चलते मैगी पर देशभर में प्रतिबंध लगाया गया था. बाद में कानूनी प्रक्रिया और अधिकृत प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच के बाद प्रतिबंध हटा और मैगी बाजार में वापस आई. फिलहाल शिशु आहार से जुड़ा नया मामला निर्णयन प्रक्रिया के समक्ष लंबित है.