फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से किसानों के लिए वैश्विक बाजार के नए अवसर: शिवराज सिंह चौहान – एग्रीवेट

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एग्रीवेट: 19 सितंबर 2026, हैदराबाद: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से किसानों के लिए वैश्विक बाजार के नए अवसर: शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर खोल रहे हैं। उन्होंने राज्यों से इन समझौतों का विस्तृत अध्ययन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग वाले कृषि उत्पादों के अनुसार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

हैदराबाद में आयोजित दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भारत के लिए वैश्विक बाजार खुल रहे हैं और यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि फलों, सब्जियों और अनाज सहित कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध अवसरों की पहचान की जानी चाहिए तथा किसानों को उन उत्पादों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनकी विदेशों में मांग है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि किसान वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग का लाभ उठा सकें।

केंद्रीय मंत्री ने दक्षिण भारत में हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने मसाले, कॉफी, काजू, कोको, नारियल और अन्य फसलों को किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

चौहान ने कहा कि भारत का नारियल निर्यात एक वर्ष में ₹4,349 करोड़ से बढ़कर ₹7,038 करोड़ हो गया है, जो 62 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने बताया कि बजट में नारियल को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि गई है, जो अब लागू होने जा रही है।

उन्होंने दक्षिणी राज्यों से इस योजना का लाभ उठाने के लिए पहले से तैयारी करने को कहा। साथ ही, पुराने नारियल बागानों के पुनर्जीवन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 60–70 वर्ष पुराने नारियल के पेड़ों में उत्पादन और गुणवत्ता कम हो सकती है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से पुराने पेड़ों को नए पौधों से बदलने की रणनीति तैयार की जानी चाहिए।

चौहान ने राज्यों से काजू और कोको के लिए प्रस्तावित प्रोत्साहन योजनाओं का भी अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए तैयारी करने को कहा।

कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में अलग-अलग राज्यों की जलवायु, मिट्टी, जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए पूरे देश के लिए एक जैसी कृषि रणनीति बनाना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने कहा कि पहले देश में एक ही रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती थी, लेकिन अब क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा को अधिक महत्व दिया जा रहा है। क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस में राज्यों को अपनी विशिष्ट समस्याओं, सुझावों और जरूरतों को केंद्र के सामने रखने का अवसर मिलता है।

दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस में कृषि और बागवानी से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ डिजिटल एग्रीकल्चर, फार्मर रजिस्ट्री, हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर, वैल्यू एडिशन, खाद्य तेल और दालों में आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा नकली कीटनाशकों और उर्वरकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

चौहान ने भारतीय कृषि के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताईं—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका सुरक्षा और पोषण सुरक्षा।

उन्होंने कहा कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश के लिए खाद्य सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत को अपनी आवश्यक खाद्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय और आजीविका की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। जो किसान देश का पेट भरता है, उसका जीवन भी सुरक्षित और समृद्ध होना चाहिए।

चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें दुनिया को बदल रही हैं, लेकिन कृषि का महत्व हमेशा बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि फल, सब्जियां और अनाज खेतों से ही मिलेंगे और इन्हें पैदा करने की जिम्मेदारी किसान की है। उन्होंने कहा कि मशीन ब्रेड बना सकती है, लेकिन गेहूं पैदा नहीं कर सकती। इसलिए किसान केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘जीवनदाता’ भी है।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से ऐसे पुराने कानूनों, नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का आह्वान किया जो किसानों और आम लोगों के लिए अनावश्यक परेशानी का कारण बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नियम लोगों के लिए होने चाहिए, लोग नियमों के लिए नहीं। जिन मामलों में केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप या बदलाव की आवश्यकता है, राज्यों को उन्हें केंद्र के सामने रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों द्वारा अपनाई गई सफल कृषि पहलों को अन्य राज्य भी अपने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि क्षेत्र के लिए अधिक प्रभावी रोडमैप तैयार किया जा सकता है।

चौहान ने बताया कि तेलंगाना में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 2 लाख मकानों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की पहली किस्त राज्य सरकार को दी जा चुकी है। इन मकानों का निर्माण अब शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सर्वे में चिन्हित ऐसे लाभार्थी, जिनके मकान अभी भी कच्चे हैं, उन्हें भी आगामी चरणों में योजना के दायरे में शामिल किया जाएगा।

दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस में केंद्र और दक्षिणी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ कृषि विशेषज्ञों, ICAR संस्थानों, प्रगतिशील किसानों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य क्षेत्र की विशिष्ट कृषि चुनौतियों पर चर्चा करना और टिकाऊ एवं मजबूत कृषि व्यवस्था के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना था।

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