पराली पर प्राथमिकी (एफआईआर) नहीं, किसानों को आर्थिक मदद! भगवंत मान ने किसान संगठनों से की बड़ी अपील – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: Punjab Farmers Protest: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान संगठनों से बार-बार प्रदर्शन करने के बजाय पहले सरकार के साथ बातचीत करने की अपील की है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के किसान मेले के उद्घाटन के दौरान मान ने कहा कि किसानों के हित से जुड़े मुद्दों पर सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. उन्होंने किसान संगठनों से अपील की कि किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन से पहले वे सरकार के साथ बैठक करें और अपनी मांगें रखें. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की जायज मांगों पर चर्चा करके रास्ता निकाला जा सकता है. उन्होंने खुद को किसानों का ‘मित्र कीड़ा’ बताते हुए कहा कि जिस तरह किसान खेत में फायदेमंद कीड़ों को बचाते हैं, उसी तरह सरकार और किसानों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए.

धान की कटाई का मौसम नजदीक आने के साथ पराली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. भगवंत मान ने कहा कि वह किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, ताकि इसे जलाने की जरूरत ही न पड़े. मान ने कहा कि पराली की समस्या का समाधान किसानों को आर्थिक मदद देने से निकाला जा सकता है. उन्होंने प्राथमिकी (एफआईआर) और सिर्फ सैटेलाइट निगरानी पर जोर देने के बजाय किसानों को नकद प्रोत्साहन देने की बात कही.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान परिवार से आने के कारण वह किसानों की समस्याओं को समझते हैं. उन्होंने दावा किया कि वह दिल्ली में पंजाब के किसानों की आवाज उठाते रहे हैं. मान ने कहा कि फसल खरीद के दौरान किसानों को समय पर भुगतान मिले, इसके लिए उनकी सरकार ने केंद्र के साथ लगातार बातचीत की है. उन्होंने कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) समय पर जारी कराने को लेकर भी केंद्र से चर्चा का जिक्र किया.

मुख्यमंत्री ने पंजाब में सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी अपनी सरकार के काम गिनाए. उनके मुताबिक, मार्च 2022 में राज्य में सिंचाई के लिए नहर के पानी का इस्तेमाल करीब 22 फीसदी था, जो अब बढ़कर 88 फीसदी हो गया है. मान ने बताया कि गांवों के अंतिम छोर तक नहर का पानी पहुंचाने के लिए करीब 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है. उन्होंने दावा किया कि नहर के पानी से किसानों को फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं. मुख्यमंत्री ने केंद्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पंजाब के कुछ हिस्सों में भूजल स्तर में सुधार का भी दावा किया.

हरियाणा और दूसरे राज्यों के साथ पानी के बंटवारे के मुद्दे पर मान ने कहा कि पंजाब अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल करेगा और दूसरे राज्यों को उनके हिस्से के मुताबिक ही पानी दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पानी छोड़े जाने से पहले उसकी सही तरीके से माप और रिकॉर्डिंग की जाएगी. मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर पंजाब की जरूरतों का ध्यान रखे बिना दूसरे राज्यों को ज्यादा पानी देने का आरोप भी लगाया.

मान ने पराली जलाने को लेकर हर साल पंजाब के किसानों पर लगने वाले आरोपों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि दिल्ली और लाहौर के प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, पंजाब सरकार जर्मनी समेत कुछ देशों की कंपनियों के साथ मिलकर धान की पराली का इस्तेमाल गैस प्लांट में करने के विकल्प तलाश रही है. इसके अलावा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी काम किया जा रहा है.

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का किसान मेला किसानों के बीच काफी अहम माना जाता है. यह मेला हर साल मार्च और सितंबर में दो बार आयोजित होता है. इस बार दो दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया गया है. मान ने मेले के दौरान किसानों से सरकार के साथ संवाद बनाए रखने और खेती से जुड़े मुद्दों पर मिलकर समाधान निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए उपलब्ध है.

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