एग्रीवेट: बिहार के किसानों के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की नई पहल शुरू की गई है. कृषि विभाग वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित करने के लिए किसानों को 50 फीसदी तक अनुदान दे रहा है. पक्की वर्मी कंपोस्ट पिट की अनुमानित लागत 10 हजार रुपये है, जिस पर किसानों को अधिकतम 5 हजार रुपये की सहायता मिलेगी. योजना का लाभ लेने के लिए किसान 30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य जैविक मिशन के तहत किसानों को वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. गया जिले में इस साल 2,000 वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित कराने का लक्ष्य रखा गया है. 18 सितंबर तक 514 किसानों ने आवेदन किया था, जबकि 1,489 वर्मी पिट को स्वीकृति दी जा चुकी है. अब शेष लक्ष्य के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं.
कृषि विभाग के अनुसार, एक पक्की वर्मी कंपोस्ट पिट की अनुमानित लागत 10 हजार रुपये तय की गई है. इस पर 50 फीसदी यानी अधिकतम 5 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा. इससे किसानों को अपनी जेब से पूरी लागत खर्च नहीं करनी पड़ेगी. योजना का उद्देश्य खेतों में जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना है. किसान इस सहायता का उपयोग अपने खेत या घर के आसपास वर्मी कंपोस्ट यूनिट तैयार करने में कर सकते हैं. इससे पशुपालन से निकलने वाले गोबर और दूसरे जैविक कचरे का भी बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इस योजना में एक किसान अधिकतम तीन वर्मी कंपोस्ट इकाइयों का लाभ उठा सकता है. कृषि विभाग के अनुसार, इच्छुक किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू है और आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर निर्धारित की गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गया के जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 2,000 वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित कराने का लक्ष्य है. चयनित किसानों को प्रत्येक यूनिट के लिए अधिकतम 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए पक्के या सीमेंटेड बेड की जरूरत होती है. इसमें ठंडा गोबर, खेत का जैविक अवशेष या किचन वेस्ट डाला जा सकता है. इसके बाद इसमें केंचुए छोड़े जाते हैं. करीब एक महीने में केंचुए जैविक सामग्री को संसाधित करके पोषक वर्मी कंपोस्ट में बदल देते हैं. इस प्रक्रिया में किसानों को बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. खासकर जिन किसानों के घर पर गाय या भैंस जैसे पशु हैं, उनके लिए गोबर का उपयोग खाद बनाने में आसानी से किया जा सकता है.
वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल खेतों के अलावा बागवानी, सब्जी उत्पादन और नर्सरी में भी किया जाता है. कृषि विभाग के अनुसार, इसका इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है. जरूरत से ज्यादा उत्पादन होने पर किसान वर्मी कंपोस्ट को बाजार में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी कर सकते हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट करीब 6 से 8 रुपये प्रति किलो तक बिक सकती है. इस तरह सरकारी अनुदान से शुरू की गई छोटी-सी यूनिट आगे चलकर किसानों के लिए जैविक खाद उत्पादन और अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है.