एग्रीवेट: Success Story: बिहार के किशनगंज में एक किसान ने ऐसी फसल को कमाई का जरिया बना लिया, जिसे कभी इस इलाके में लोग सिर्फ दूसरे राज्यों में उगते हुए देखते थे. बिहार के किसान हंसराज नखत (Hansraj Nakhat) ने ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती को अपनी आर्थिक सफलता का जरिया बना लिया है. वर्ष 2014 में शुरू किया गया उनका प्रयोग आज एक सफल कृषि मॉडल बन चुका है. करीब सवा एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर वह हर साल लगभग 10 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त कर रहे हैं. कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार, हंसराज की सफलता किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाने की प्रेरणादायक मिसाल है. कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार, हंसराज नखत ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने से पहले आत्मा किशनगंज से प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में इस फसल को अपने खेत में लगाने का फैसला किया. शुरुआती दौर में यह उनके लिए नया प्रयोग था, लेकिन लगातार मेहनत, तकनीकी जानकारी और फसल की देखभाल ने इसे सफल बना दिया. आज वह अपने क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों के बीच एक मिसाल बन चुके हैं. हंसराज के सवा एकड़ के प्लॉट में ड्रैगन फ्रूट की दो किस्में लगाई गई हैं. इनमें सामान्य रेड वैरायटी के साथ हैदराबाद वाली सी वैरायटी भी शामिल है. किसान के मुताबिक, पौधे लगाने के बाद लगभग 24 महीने तक इंतजार करना पड़ता है, जिसके बाद उत्पादन शुरू होता है. सही प्रबंधन और अनुकूल परिस्थितियों में यह फसल लंबे समय तक आमदनी देने की क्षमता रखती है. किसान के अनुसार, भारत में ड्रैगन फ्रूट में अप्रैल से फ्लावरिंग और बडिंग शुरू हो जाती है. कली आने के बाद करीब 40 दिन में फूल से फल बनने की प्रक्रिया पूरी होती है. इसके बाद फूल खिलने से फल के आकार लेने तक लगभग 15 दिन और लगते हैं. ड्रैगन फ्रूट का आकर्षक रंग, स्वाद और पौष्टिकता इसे बाजार में खास बनाते हैं. औषधीय गुणों से भरपूर इस फल की मांग भी बढ़ रही है. हंसराज के मुताबिक, जैविक तरीके से खेती करने पर बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है.