एग्रीवेट: भारत का खाद्य तेल आयात चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में 4.56 फीसदी बढ़कर 136.19 लाख टन हो गया. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2024 से अगस्त 2025 के दौरान खाद्य तेल का आयात 130.24 लाख टन रहा था. इस बार पाम तेल और सोयाबीन तेल के आयात में बढ़ोतरी से कुल आयात बढ़ा है. नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान पाम तेल का आयात बढ़कर 65.34 लाख टन हो गया, जो पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में 61.47 लाख टन था. इसी तरह सोयाबीन तेल का आयात 45.61 लाख टन रहा, जबकि पिछले साल 44.64 लाख टन था. सूरजमुखी तेल का आयात भी बढ़कर 25.15 लाख टन हो गया, जो पहले 24 लाख टन था. यानी महीने-दर-महीने आधार पर भी खाद्य तेल आयात में मामूली बढ़ोतरी हुई है. वहीं, जुलाई 2026 में 15.49 लाख टन के मुकाबले अगस्त में आयात बढ़कर 15.72 लाख टन हो गया. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने बिजनेसलाइन से कहा कि अगस्त में खाद्य तेल के आयात में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे सोयाबीन तेल का आयात बढ़ना रहा. अगस्त में भारत ने 5.54 लाख टन कच्चा सोयाबीन तेल आयात किया, जो पिछले आंकड़े 3.67 लाख टन से करीब 11 फीसदी अधिक है. रिफाइंड सोयाबीन तेल का आयात भी 19 फीसदी बढ़कर 74,000 टन हो गया. मेहता ने कहा कि भारत में नेपाल से रिफाइंड तेल का आयात भी लगातार बड़े स्तर पर हो रहा है. नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान नेपाल ने भारत को 5.98 लाख टन रिफाइंड तेल भेजा. इसमें 5.31 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 33,881 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल, 28,728 टन RBD पामोलीन और 4,428 टन रेपसीड तेल शामिल है. उन्होंने बताया कि नेपाल मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन तेल आयात करता है और उसे रिफाइन करने के बाद भारत को भेजता है. SAFTA समझौते के तहत नेपाल से भारत आने वाले इन उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगता. भारत में चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में कच्चे खाद्य तेल के आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जबकि रिफाइंड तेल का आयात घट गया. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान रिफाइंड खाद्य तेल का आयात घटकर 6.59 लाख टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 16.36 लाख टन था. कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी भी 13 फीसदी से घटकर 5 फीसदी रह गई. इसकी मुख्य वजह इंडोनेशिया और मलेशिया से रिफाइंड पामोलीन का आयात लगभग नगण्य होना है. इसके उलट, कच्चे खाद्य तेल का आयात बढ़कर 129.60 लाख टन हो गया, जो पिछले साल 113.88 लाख टन था. कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी भी 87 फीसदी से बढ़कर 95 फीसदी हो गई. तेल वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेल भेजने वाला सबसे बड़ा देश रहा. अर्जेंटीना ने भारत को 30.59 लाख टन खाद्य तेल भेजा. इसमें 23.72 लाख टन कच्चा सोयाबीन तेल और 6.87 लाख टन सूरजमुखी तेल शामिल था. इसी अवधि में रूस ने 12.28 लाख टन खाद्य तेल भेजा. इसमें 93,756 टन कच्चा सोयाबीन तेल और 11.34 लाख टन कच्चा सूरजमुखी तेल शामिल था. वहीं, मलेशिया ने भारत को 26.20 लाख टन पाम तेल भेजा. इसमें 25.86 लाख टन कच्चा पाम तेल और 19,998 टन RBD पामोलीन था. वहीं, इंडोनेशिया से 25.68 लाख टन पाम तेल आया. इसमें 25.23 लाख टन कच्चा पाम तेल और 45,180 टन RBD पामोलीन शामिल था.